Monday, 13 March 2017

प्रीत की होली


प्रीत की होली परी, तुझ संग खेली कान्हा..
प्रीत की होली परी, तुझ संग खेली कान्हा..

जीवन गलियां सूखी, मेरी अखियाँ रूखी
तुझ बिन ओ कान्हा मेरी, सब रतियाँ रूठी
प्रीत की होली परी, तुझ संग खेली कान्हा.. 

जब से तेरा रंग चढ़ा, सब रंग मुझे फीके लगें
तन-मन श्वेत-पावन हो, सब रंग निखरे लागें
प्रीत की होली परी, तुझ संग खेली कान्हा..

प्रीत रंग में ऐसी रंगी मैं, जोगन बन बन नाचूँ
लोग कहें बाँवरी मुझे, कान्हा मैं तेरी राधा कहाऊँ
प्रीत की होली परी, तुझ संग खेली कान्हा..

मस्त मगन, जिया धड़क धड़क, ओ कान्हा
जिया जाए न जाए न तेरे बिन, ओ रे कान्हा
प्रीत की होली परी, तुझ संग खेली कान्हा..

आज फिर दिल ये चाहे, आकर तू मोहे अंग लगाये
होली तेरी-मेरी प्रीत की, और कोई न होली होये
प्रीत की होली परी, तुझ संग खेली कान्हा..



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