अब न बुलाना
फिर उस नाम से
न ही करना फ़ोन
न कोई व्हाट्सअप
न किसी बिचोलिये से भेजना
टूटे तार जोड़ने का कोई सन्देश
टूटे तार और जंग लगी बेड़ियां
सिर्फ लहूलुहान ही करती हैं
जिस्म और रूह को...
इसलिए देखो तोड़ ही दी मैंने
समय रहते ही
बुज़दिल ज़माने की रिवायतें..
कच्चे धागे से बंधा कसैला रिश्ता.....
हम-तुम से टूट कर हो गए अलग, तुम
अब हूँ सिर्फ मैं..
नीले आकाश में
स्वछंद विचरण करती
मैं परी, नीलपरी...

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