Tuesday, 31 January 2017

तेरी मेरी प्रेम कहानी


इक सुरमयी सर्द सी साँझ
यूँ ही ख्यालों को गूँधती
बेला चमेली की खुशबु में
तेरी महक को तलाशती
यादों के पिटारे से
कुछ मचलते पलों को चुनती
धड़कनों के ताप पर पकाती
तेरे इश्क़ की चांदनी में बहकती
तेरी नज़रों की तपिश से
अपना ही अक्स निहारती
खुद पे इतराती
थोड़ा लज्जाती, थोड़ा शर्माती
यादों वाली तारकों की चुनरी में
कुछ नए एहसास टांकती
मिलन से जुदाई
जुदाई से मिलन के
लम्हों ही लम्हों की
दूरी को नापती
इंतज़ार के स्याह पलों को बाँचती
तुझे सुनाने को गढ़ ही देती हूँ
इक नई प्रेम कहानी
तेरी-मेरी......

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