Wednesday, 25 January 2017

गणतंत्र दिवस


फ़ौजी, सैनिक, सिपाही
कमांडर, कर्नल, ब्रिगेडियर
हम-आप, हमारे अपने सब पास
हम तो बस छवि ही देखते हैं
बॉर्डर-टैंगो चार्ली जैसी फिल्मों में
कभी ये हमारे नायक बनते हैं
फ़िल्म के नायक के रूप में
कहीं स्टूडेंट्स के रोल मॉडल
कॉलेज के सीरियल के रोल में
पर क्या मिले हम कभी...
उस माँ से जिसका कोखजना
भेजा गया बॉर्डर ड्यूटी पर
पूछा दर्द उस नवबिहाता का
जो हुई सपने और चूड़ियाँ तोड़ने मज़बूर
चढ़ गया जिसका सुहाग आतंकवाद की भेंट
या फिर बात की चुप लगा गए उस पिता से
जिसके जीने की आखिरी उम्मीद
मैडलों और गोलियों से छलनी
भेज दिया गया बक्से में बंद
देश के सम्मान, तिरंगे में लपेट
:
आतंकी हमले होते रहेंगे, शहीद बनते रहेंगे
सत्रह-पचास-सौ तो मात्र संख्या है, देशवासियों
मीडिया-रिपोर्टरों-राजनेताओं के मखोल का
कौन जाने कितने घर उजड़े
कौन गिने कितनी कोख उजड़ी
किसको परवाह कितनी चूड़ियाँ बिखरी
कौन देखे कितनी आस टूटी
घरों में टीवी चैनेलों के आगे
कुछ आक्रोश, कुछ नम आँखें
सड़कों, बाज़ारों, थियेटरों में पर
भीड़ तो कुछ न कम हुई
चल पड़े सब अपने अपने धाम
सच, किसी के लिए
ज़िन्दगी कब-कहाँ रुकी....



देश ने हमें क्या दिया, यह सोच हुई पुरानी..
मैंने देश के लिए क्या किया, यह सोच अब  बनानी

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