Sunday, 21 May 2017

एक्सपायरी डेट

वो कहते हैं
वो सच ही तो कहते हैं
जिस्म मरता है
रूह नहीं मरती
रूह तो,
अजर है
अमर है
जिस्म की उम्र होती है
बोतल पर लिखी
एक्सपायरी पढ़ते हो न
ऐसी ही एक्सपायरी डेट के साथ
आता है इक इक जिस्म
या के फिर मैन्युफैक्चर होता है
खुशियाँ मनाते हो न
हर बर्थडे
ऐसे ही मनाना तुम
खुशियाँ
एक्सपायरी एनिवर्सरी पर भी
और करना इंतज़ार
रूह का मेरी
क्योंकि
आऊँगी न फिर फिर
पहन नया चोला
अगले,
फिर उससे अगले जन्म,
हर जन्म
तुम्हारी
सिर्फ तुम्हारी
परी बनकर
पहचानना होगा तुमको
मेरी पलकों से छुपी
आँखों की गहराई में उतर
तलाशना होगा अपना अक्स
क्योंकि
वो कहते हैं न
शरीर बदलता है
पर आँखें नहीं बदलती
एक प्रेममयी रूह

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