कह दो उससे
याद आती तो है
कभी कभार उसकी
पर अब नहीं बनते
वो पारदर्शी
नमकीन बुलबुले
नीली आँखों के कोर..
अब नहीं धड़कता दिल
सुनके उसका नाम
दिल मचलता तो है
पहनने को उसका दिया
जयपुरी नीला सूट और
उससे मैच करते
चांदी के बूंदे
पर ज़िद नहीं करता..
रात आती तो है अब भी
पर नहीं जाते अब
हम और तुम
ख्वाब में भी
डल झील के उस पार..
सूख गए बौगैनविल्ला
गुडहल जो बोये थे
हमने संग संग
बंद कर दिए मँगाने
फूलवाले से भी फूल
मुरझा जो गए उसके दिए
हर रंग के नायाब गुलाब..
हाँ कह दो उससे
कैनवास पे चेहरे नहीं
अब बनते हैं हमसे
सूरज चाँद और तारे..
अब क्यूं सताएगी
तनहा रात हमें
करती है न वो हमसे
कहानी भोर तलक....
याद आती तो है
कभी कभार उसकी
पर अब नहीं बनते
वो पारदर्शी
नमकीन बुलबुले
नीली आँखों के कोर..
अब नहीं धड़कता दिल
सुनके उसका नाम
दिल मचलता तो है
पहनने को उसका दिया
जयपुरी नीला सूट और
उससे मैच करते
चांदी के बूंदे
पर ज़िद नहीं करता..
रात आती तो है अब भी
पर नहीं जाते अब
हम और तुम
ख्वाब में भी
डल झील के उस पार..
सूख गए बौगैनविल्ला
गुडहल जो बोये थे
हमने संग संग
बंद कर दिए मँगाने
फूलवाले से भी फूल
मुरझा जो गए उसके दिए
हर रंग के नायाब गुलाब..
हाँ कह दो उससे
कैनवास पे चेहरे नहीं
अब बनते हैं हमसे
सूरज चाँद और तारे..
अब क्यूं सताएगी
तनहा रात हमें
करती है न वो हमसे
कहानी भोर तलक....
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