Friday, 16 December 2016

हर पल जीवन














जीवन की आपा धापी में
कितने चेहरे बदल गए
सब को खुश रखते रखते
हम ही मानो टूट गए
हर पल जीवन जीते जीते
हर पल हम ही बदल गए
लम्हे दिन, दिन साल हुए
जाने कितने ही संगी साथ हुए
जिसको भी हमराज बनाना चाहा
हर बार उसी से ठेस लगी
हमसफ़र की इच्छा रखते रखते
हम ही मानो टूट गए
जीवन की आपा धापी में
कितने चेहरे बदल गए
कुछ दोस्त बने, कुछ रिश्ते
कुछ हर सूरत में साथ चले
कुछ दो पल में ही रूठ गए
कुछ हमसे ही पीछे छूट गए
हर आंसू में मुस्कान ढूंढते
हम ही खाली आँख रहे
जीवन की आपा धापी में
कितने चेहरे बदल गए
अनजान डगर, अनजान सफ़र
राह में वो साथ हुए
हाथो में हाथ, हसरत में हसरत
कितने यूँ दिन चार हुए
कुछ अहसासों को पूरा करते करते
कुछ अग्नि कुंड में होम हुए
जीवन की आपा धापी मैं
कितने चेहरे बदल गए
आज नाचते, कल थे सोये
आज बोलते, कल थे रोये
हाड़ मांस की, इस काठी में
कितने अरमान धड़क गए
अपना सरमाया उसे कहते कहते
कितने ही शब्द सूँख गए
जीवन की आपा धापी में
कितने चेहरे बदल गए
हर पल जीवन जीते जीते
हर पल हम ही बदल गए


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