Friday, 16 December 2016

नेमप्लेट


कच्ची ईंट के बने
महलों को
संग ही दुनियावी
रिवायतों को
बेड़ियों में जकड़े सामाजिक
आडम्बरों को
लात मार के उठ खड़ी होती है
बचाये अपने स्वाभिमान को
किसी अन्धड़,किसी सुनामी
किसी भूचाल से अब नहीं डरती वो
महल, जहाँ गूंजती थी दर्द भरी आहें
शराब के नशे में मदमाते
फिंके बर्तनों से दागदार थी दीवारें
अत्याचारी-व्याभिचारी की
मार से छलनी थे, जिस्म-ओ-जान
भूल अपना अपमान,
कोखजाए की खोई मुस्कान,
तिनका तिनका जोड़
बना ही लिया,
दृढ़संकल्पी स्नोवाइट ने
प्रभु की नेमतों वाला
अपना घरौंदा
नेमप्लेट पर लिखा जिसके
चमचमाते अक्षरों में
उसका अपना ही नाम....

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