बोझिल कदम
थके-हारे एहसास
जिस्म हुआ बेजान
फिर भी रूह अभी मरी नहीं।जिस्म हुआ बेजान
छलिये पर
फिर फिर किया एतबार
विश्वास का हुआ आत्मघात
फिर भी रूह अभी मरी नहीं।
फिर फिर किया एतबार
विश्वास का हुआ आत्मघात
फिर भी रूह अभी मरी नहीं।
अनंत तक तनहा सफ़र
कब लगेगी नैया भवसागर पार
अकेले खेते खेते पतवार
गुलाबी हथेलियां लहू लुहान
फिर भी रूह अभी मरी नहीं।
कब लगेगी नैया भवसागर पार
अकेले खेते खेते पतवार
गुलाबी हथेलियां लहू लुहान
फिर भी रूह अभी मरी नहीं।
गोरी कलाईयाँ चूड़ा चढ़ा
मेहँदी की शोख रंगत करे चीत्कार
बिलखती सिसकती दुल्हन सी उम्र
फिर भी रूह अभी मरी नहीं।
मेहँदी की शोख रंगत करे चीत्कार
बिलखती सिसकती दुल्हन सी उम्र
फिर भी रूह अभी मरी नहीं।
कलेजे से लगाये तेरीे रोपी पौध
परवरिश, बने जगत का ताज
लड़खड़ाते कदम, बुझता सा दिल
थामे साईं की आस-विश्वास की डोर
अनिश्चितता से कांपता है दिल
फिर भी रूह अभी मरी नहीं
परवरिश, बने जगत का ताज
लड़खड़ाते कदम, बुझता सा दिल
थामे साईं की आस-विश्वास की डोर
अनिश्चितता से कांपता है दिल
फिर भी रूह अभी मरी नहीं

Awesome lines
ReplyDeleteThnxx a lot💐
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